महाभारत 1.79.28
प्रतिपत्स्यामि ते राजन्पाप्मानं जरया सहगृहाण यौवनं मत्तश्चर कामान्यथेप्सितान्
pratipatsyāmi te rājanpāpmānaṃ jarayā sahagṛhāṇa yauvanaṃ mattaścara kāmānyathepsitān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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