महाभारत 10.1.15
कृतं सत्यं वचस्तस्य विदुरस्य महात्मनःअकुर्वता वचस्तेन मम पुत्रेण संजय
kṛtaṃ satyaṃ vacastasya vidurasya mahātmanaḥakurvatā vacastena mama putreṇa saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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