महाभारत 10.1.16
अधर्मेण हते तात पुत्रे दुर्योधने ममकृतवर्मा कृपो द्रौणिः किमकुर्वत संजय
adharmeṇa hate tāta putre duryodhane mamakṛtavarmā kṛpo drauṇiḥ kimakurvata saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें