महाभारत 10.2.12
तत्रालसा मनुष्याणां ये भवन्त्यमनस्विनःउत्थानं ते विगर्हन्ति प्राज्ञानां तन्न रोचते
tatrālasā manuṣyāṇāṃ ye bhavantyamanasvinaḥutthānaṃ te vigarhanti prājñānāṃ tanna rocate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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