महाभारत 10.2.15
शक्नोति जीवितुं दक्षो नालसः सुखमेधतेदृश्यन्ते जीवलोकेऽस्मिन्दक्षाः प्रायो हितैषिणः
śaknoti jīvituṃ dakṣo nālasaḥ sukhamedhatedṛśyante jīvaloke'smindakṣāḥ prāyo hitaiṣiṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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