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महाभारत 10.2.7
प्रवृष्टे च यथा देवे सम्यक्क्षेत्रे च कर्षितेबीजं महागुणं भूयात्तथा सिद्धिर्हि मानुषी
pravṛṣṭe ca yathā deve samyakkṣetre ca karṣitebījaṃ mahāguṇaṃ bhūyāttathā siddhirhi mānuṣī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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