महाभारत 10.9.18
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
तं शयानं नृपश्रेष्ठं ततो भरतसत्तमअश्वत्थामा समालोक्य करुणं पर्यदेवयत्
taṃ śayānaṃ nṛpaśreṣṭhaṃ tato bharatasattamaaśvatthāmā samālokya karuṇaṃ paryadevayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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