महाभारत 10.9.19
आहुस्त्वां राजशार्दूल मुख्यं सर्वधनुष्मताम्धनाध्यक्षोपमं युद्धे शिष्यं संकर्षणस्य ह
āhustvāṃ rājaśārdūla mukhyaṃ sarvadhanuṣmatāmdhanādhyakṣopamaṃ yuddhe śiṣyaṃ saṃkarṣaṇasya ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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