महाभारत 10.9.39
वयमेव त्रयो राजन्गच्छन्तं परमां गतिम्यद्वै त्वां नानुगच्छामस्तेन तप्स्यामहे वयम्
vayameva trayo rājangacchantaṃ paramāṃ gatimyadvai tvāṃ nānugacchāmastena tapsyāmahe vayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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