महाभारत 11.21.10
पश्य कर्णस्य पत्नीं त्वं वृषसेनस्य मातरम्लालप्यमानाः करुणं रुदतीं पतितां भुवि
paśya karṇasya patnīṃ tvaṃ vṛṣasenasya mātaramlālapyamānāḥ karuṇaṃ rudatīṃ patitāṃ bhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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