महाभारत 12.106.15
आरम्भांश्चास्य महतो दुष्करांस्त्वं प्रयोजयनदीबन्धविरोधांश्च बलवद्भिर्विरुध्यताम्
ārambhāṃścāsya mahato duṣkarāṃstvaṃ prayojayanadībandhavirodhāṃśca balavadbhirvirudhyatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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