महाभारत 12.127.5उपयातो नरव्याघ्र लोकपालो यमस्तदातमपश्यत्सुतपसमृषिं वै गौतमं मुनिम्upayāto naravyāghra lokapālo yamastadātamapaśyatsutapasamṛṣiṃ vai gautamaṃ munimइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें