महाभारत 12.131.13
नायं लोकोऽस्ति न पर इति व्यवसितो जनःनालं गन्तुं च विश्वासं नास्तिके भयशङ्किनि
nāyaṃ loko'sti na para iti vyavasito janaḥnālaṃ gantuṃ ca viśvāsaṃ nāstike bhayaśaṅkini
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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