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महाभारत 12.143.5
सोऽहं त्यक्ष्ये प्रियान्प्राणान्पुत्रदारं विसृज्य चउपदिष्टो हि मे धर्मः कपोतेनातिधर्मिणा
so'haṃ tyakṣye priyānprāṇānputradāraṃ visṛjya caupadiṣṭo hi me dharmaḥ kapotenātidharmiṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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