Loading
महाभारत 12.190.5
अहंकारकृतश्चैव सर्वे निरयगामिनःपरावमानी पुरुषो भविता निरयोपगः
ahaṃkārakṛtaścaiva sarve nirayagāminaḥparāvamānī puruṣo bhavitā nirayopagaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअहंकारकृतश्चैव सर्वे निरयगामिनःपरावमानी पुरुषो भविता निरयोपगः
ahaṃkārakṛtaścaiva sarve nirayagāminaḥparāvamānī puruṣo bhavitā nirayopagaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें