महाभारत 12.193.5
फलेनानेन संयुक्तो राजर्षे गच्छ पुण्यताम्भवता चाभ्यनुज्ञातो जपेयं भूय एव हि
phalenānena saṃyukto rājarṣe gaccha puṇyatāmbhavatā cābhyanujñāto japeyaṃ bhūya eva hi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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