महाभारत 12.266.13
तदेतदुपशान्तेन बोद्धव्यं शुचिकर्मणायोगदोषान्समुच्छिद्य पञ्च यान्कवयो विदुः
tadetadupaśāntena boddhavyaṃ śucikarmaṇāyogadoṣānsamucchidya pañca yānkavayo viduḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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