महाभारत 12.272.37
महत्त्वं योगिनां चैव महामायत्वमेव चमहाबलत्वं च तथा तेजश्चाग्र्यं सुरेश्वर
mahattvaṃ yogināṃ caiva mahāmāyatvameva camahābalatvaṃ ca tathā tejaścāgryaṃ sureśvara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें