महाभारत 12.272.3
भवता कथितं ह्येतच्छ्रद्दधे चाहमच्युतभूयस्तु मे समुत्पन्ना बुद्धिरव्यक्तदर्शनात्
bhavatā kathitaṃ hyetacchraddadhe cāhamacyutabhūyastu me samutpannā buddhiravyaktadarśanāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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