महाभारत 12.287.12
यथा भानुगतं तेजो मणिः शुद्धः समाधिनाआदत्ते राजशार्दूल तथा योगः प्रवर्तते
yathā bhānugataṃ tejo maṇiḥ śuddhaḥ samādhināādatte rājaśārdūla tathā yogaḥ pravartate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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