महाभारत 12.293.10
अशुद्ध एव शुद्धात्मा तादृग्भवति पार्थिवअबुद्धसेवनाच्चापि बुद्धोऽप्यबुधतां व्रजेत्
aśuddha eva śuddhātmā tādṛgbhavati pārthivaabuddhasevanāccāpi buddho'pyabudhatāṃ vrajet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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