महाभारत 12.293.21
मोक्षकामा वयं चापि काङ्क्षामो यदनामयम्अदेहमजरं दिव्यमतीन्द्रियमनीश्वरम्
mokṣakāmā vayaṃ cāpi kāṅkṣāmo yadanāmayamadehamajaraṃ divyamatīndriyamanīśvaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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