महाभारत 12.293.2
धाम्ना धामसहस्राणि मरणान्तानि गच्छतितिर्यग्योनौ मनुष्यत्वे देवलोके तथैव च
dhāmnā dhāmasahasrāṇi maraṇāntāni gacchatitiryagyonau manuṣyatve devaloke tathaiva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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