महाभारत 12.293.43
अप्रबुद्धमथाव्यक्तं सगुणं प्राहुरीश्वरम्निर्गुणं चेश्वरं नित्यमधिष्ठातारमेव च
aprabuddhamathāvyaktaṃ saguṇaṃ prāhurīśvaramnirguṇaṃ ceśvaraṃ nityamadhiṣṭhātārameva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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