महाभारत 12.304.3
पृथक्पृथक्तु पश्यन्ति येऽल्पबुद्धिरता नराःवयं तु राजन्पश्याम एकमेव तु निश्चयात्
pṛthakpṛthaktu paśyanti ye'lpabuddhiratā narāḥvayaṃ tu rājanpaśyāma ekameva tu niścayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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