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महाभारत 12.319.1
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
गिरिपृष्ठं समारुह्य सुतो व्यासस्य भारतसमे देशे विविक्ते च निःशलाक उपाविशत्
giripṛṣṭhaṃ samāruhya suto vyāsasya bhāratasame deśe vivikte ca niḥśalāka upāviśat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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