महाभारत 12.319.2
धारयामास चात्मानं यथाशास्त्रं महामुनिःपादात्प्रभृति गात्रेषु क्रमेण क्रमयोगवित्
dhārayāmāsa cātmānaṃ yathāśāstraṃ mahāmuniḥpādātprabhṛti gātreṣu krameṇa kramayogavit
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें