महाभारत 12.328.2
वक्तुमर्हसि शुश्रूषोः प्रजापतिपतेर्हरेःश्रुत्वा भवेयं यत्पूतः शरच्चन्द्र इवामलः
vaktumarhasi śuśrūṣoḥ prajāpatipaterhareḥśrutvā bhaveyaṃ yatpūtaḥ śaraccandra ivāmalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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