महाभारत 12.33.3बहवश्च मनुष्येन्द्रा नानादेशसमागताःघातिता राज्यलुब्धेन मयैकेन पितामहbahavaśca manuṣyendrā nānādeśasamāgatāḥghātitā rājyalubdhena mayaikena pitāmahaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें