महाभारत 12.33.4
तांस्तादृशानहं हत्वा धर्मनित्यान्महीक्षितःअसकृत्सोमपान्वीरान्किं प्राप्स्यामि तपोधन
tāṃstādṛśānahaṃ hatvā dharmanityānmahīkṣitaḥasakṛtsomapānvīrānkiṃ prāpsyāmi tapodhana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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