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महाभारत 12.331.30
श्वेतद्वीपे मया दृष्टास्तादृशावृषिसत्तमौइति संचिन्त्य मनसा कृत्वा चाभिप्रदक्षिणम्उपोपविविशे तत्र पीठे कुशमये शुभे
śvetadvīpe mayā dṛṣṭāstādṛśāvṛṣisattamauiti saṃcintya manasā kṛtvā cābhipradakṣiṇamupopaviviśe tatra pīṭhe kuśamaye śubhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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