महाभारत 12.331.35
अपीदानीं स भगवान्परमात्मा सनातनःश्वेतद्वीपे त्वया दृष्ट आवयोः प्रकृतिः परा
apīdānīṃ sa bhagavānparamātmā sanātanaḥśvetadvīpe tvayā dṛṣṭa āvayoḥ prakṛtiḥ parā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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