महाभारत 12.331.37
यैर्लक्षणैरुपेतः स हरिरव्यक्तरूपधृक्तैर्लक्षणैरुपेतौ हि व्यक्तरूपधरौ युवाम्
yairlakṣaṇairupetaḥ sa hariravyaktarūpadhṛktairlakṣaṇairupetau hi vyaktarūpadharau yuvām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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