महाभारत 12.331.38
दृष्टौ मया युवां तत्र तस्य देवस्य पार्श्वतःइह चैवागतोऽस्म्यद्य विसृष्टः परमात्मना
dṛṣṭau mayā yuvāṃ tatra tasya devasya pārśvataḥiha caivāgato'smyadya visṛṣṭaḥ paramātmanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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