महाभारत 12.331.52
एवं मे भगवान्देवः स्वयमाख्यातवान्हरिःआसिष्ये तत्परो भूत्वा युवाभ्यां सह नित्यशः
evaṃ me bhagavāndevaḥ svayamākhyātavānhariḥāsiṣye tatparo bhūtvā yuvābhyāṃ saha nityaśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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