महाभारत 12.331.5
स हीशो भगवान्देवः सर्वभूतात्मभावनःअहो नारायणं तेजो दुर्दर्शं द्विजसत्तम
sa hīśo bhagavāndevaḥ sarvabhūtātmabhāvanaḥaho nārāyaṇaṃ tejo durdarśaṃ dvijasattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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