महाभारत 12.340.4
अपि च त्वं नरव्याघ्र श्रोतुमर्हसि मे कथाम्पुरा शक्रस्य कथितां नारदेन सुरर्षिणा
api ca tvaṃ naravyāghra śrotumarhasi me kathāmpurā śakrasya kathitāṃ nāradena surarṣiṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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