महाभारत 12.346.9
न हि नो भ्रूणहा कश्चिद्राजापथ्योऽनृतोऽपि वापूर्वाशी वा कुले ह्यस्मिन्देवतातिथिबन्धुषु
na hi no bhrūṇahā kaścidrājāpathyo'nṛto'pi vāpūrvāśī vā kule hyasmindevatātithibandhuṣu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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