महाभारत 12.347.9
अहं कस्य कुतो वाहं कः को मे ह भवेदितिप्रयोजनमतिर्नित्यमेवं मोक्षाश्रमी भवेत्
ahaṃ kasya kuto vāhaṃ kaḥ ko me ha bhaveditiprayojanamatirnityamevaṃ mokṣāśramī bhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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