महाभारत 12.48.7
गच्छन्नेव महाबाहुः सर्वयादवनन्दनःयुधिष्ठिराय प्रोवाच जामदग्न्यस्य विक्रमम्
gacchanneva mahābāhuḥ sarvayādavanandanaḥyudhiṣṭhirāya provāca jāmadagnyasya vikramam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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