महाभारत 12.48.9
त्रिःसप्तकृत्वो वसुधां कृत्वा निःक्षत्रियां प्रभुःइहेदानीं ततो रामः कर्मणो विरराम ह
triḥsaptakṛtvo vasudhāṃ kṛtvā niḥkṣatriyāṃ prabhuḥihedānīṃ tato rāmaḥ karmaṇo virarāma ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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