महाभारत 12.5.4
बाहुकण्टकयुद्धेन तस्य कर्णोऽथ युध्यतःबिभेद संधिं देहस्य जरया श्लेषितस्य ह
bāhukaṇṭakayuddhena tasya karṇo'tha yudhyataḥbibheda saṃdhiṃ dehasya jarayā śleṣitasya ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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