महाभारत 12.5.9स दिव्ये सहजे प्रादात्कुण्डले परमार्चितेसहजं कवचं चैव मोहितो देवमाययाsa divye sahaje prādātkuṇḍale paramārcitesahajaṃ kavacaṃ caiva mohito devamāyayāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें