महाभारत 12.51.2
नमस्ते भगवन्विष्णो लोकानां निधनोद्भवत्वं हि कर्ता हृषीकेश संहर्ता चापराजितः
namaste bhagavanviṣṇo lokānāṃ nidhanodbhavatvaṃ hi kartā hṛṣīkeśa saṃhartā cāparājitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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