महाभारत 12.52.19
यद्यच्च धर्मसंयुक्तमर्थयुक्तमथापि वाचिन्तयिष्यसि तत्राग्र्या बुद्धिस्तव भविष्यति
yadyacca dharmasaṃyuktamarthayuktamathāpi vācintayiṣyasi tatrāgryā buddhistava bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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