महाभारत 12.52.20
इमं च राजशार्दूल भूतग्रामं चतुर्विधम्चक्षुर्दिव्यं समाश्रित्य द्रक्ष्यस्यमितविक्रम
imaṃ ca rājaśārdūla bhūtagrāmaṃ caturvidhamcakṣurdivyaṃ samāśritya drakṣyasyamitavikrama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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