महाभारत 12.52.21
चतुर्विधं प्रजाजालं संयुक्तो ज्ञानचक्षुषाभीष्म द्रक्ष्यसि तत्त्वेन जले मीन इवामले
caturvidhaṃ prajājālaṃ saṃyukto jñānacakṣuṣābhīṣma drakṣyasi tattvena jale mīna ivāmale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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