महाभारत 12.52.3
किं चाहमभिधास्यामि वाक्पते तव संनिधौयदा वाचोगतं सर्वं तव वाचि समाहितम्
kiṃ cāhamabhidhāsyāmi vākpate tava saṃnidhauyadā vācogataṃ sarvaṃ tava vāci samāhitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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