महाभारत 12.67.28
विजयायाशु निर्याहि प्रतपन्रश्मिमानिवमानं विधम शत्रूणां धर्मो जयतु नः सदा
vijayāyāśu niryāhi pratapanraśmimānivamānaṃ vidhama śatrūṇāṃ dharmo jayatu naḥ sadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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