महाभारत 12.67.9
भूयांसं लभते क्लेशं या गौर्भवति दुर्दुहासुदुहा या तु भवति नैव तां क्लेशयन्त्युत
bhūyāṃsaṃ labhate kleśaṃ yā gaurbhavati durduhāsuduhā yā tu bhavati naiva tāṃ kleśayantyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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